मंगलवार 1 सितंबर 2026 - 12:06
मुसलमानों की एकता इज़्ज़त और इक़्तेदार की बहाली का ज़रिया हैः शेख ज़कज़की

नाइजीरिया की इस्लामी तहरीक के रहनुमा शेख इब्राहीम जकज़की ने उम्मत-ए-मुस्लिमा के दरमियान इत्तिहाद और यकजहती की अहमियत पर ज़ोर देते हुए कहा है कि मुसलमानों का इत्तिहाद ही उनकी इज़्ज़त, ताक़त और इख़्तियार की बहाली का रास्ता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, शेख इब्राहीम जकज़की ने नाइजीरिया के मुख्तलिफ़ इलाकों से आने वाले बड़ी तादाद में मुसलमानों के इज्तिमा से खिताब किया। यह तकरीब जश्न-ए-मीलाद-ए-रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि व सल्लम और हफ्ता-ए-वहदत-ए-मुस्लिमीन की मुनासिबत से अबूजा में मुनअकिद हुई।

शेख जकज़की ने रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि व सल्लम के आली अख़लाक़ का ज़िक्र करते हुए कहा कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि व सल्लम ने अपने हुस्न-ए-अख़लाक़ के ज़रिये दुश्मनों पर ग़लबा हासिल किया। उन्होंने रसूल-ए-ख़ुदा सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि व सल्लम की अफ़्व-ओ-दरगुज़र, मेहरबानी और रहमत को याद करते हुए कहा कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि व सल्लम ने उन लोगों को भी मुआफ़ किया जिन्होंने आप को अज़ीयत पहुँचाई थी।

उन्होंने कहा कि रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि व सल्लम उम्मत-ए-मुस्लिमा के लिए बेहतरीन अख़लाक़ और नेक किरदार का नमूना और मेयार होने चाहिए।

नाइजीरिया की इस्लामी तहरीक के रहनुमा ने मुसलमानों के दरमियान इत्तिहाद की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि आज मुसलमानों को दरपेश कमज़ोरी और पसमानदगी का एक अहम सबब उनका बाहमी इंतिशार और तफ़र्रुक़ा है।

उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वह इस्लाम के मुफ़ाद में मुत्तहिद और मुनज़्ज़म हों। उनके बक़ौल, मुसलमानों का इत्तिहाद उनकी इज़्ज़त व इख़्तियार को दोबारा बहाल कर सकता है, जबकि इस्लाम के दुश्मन ऐसा नहीं चाहते क्योंकि मुसलमानों के दरमियान इख़्तिलाफ़ात से उन्हीं को फ़ायदा पहुँचता है।

शेख जकज़की ने उम्मत-ए-मुस्लिमा के मुस्तक़बिल के हवाले से उम्मीद का इज़हार करते हुए कहा कि मुसलमानों की मौजूदा सूरत-ए-हाल हमेशा बरक़रार नहीं रहेगी, दीन मज़बूत व मुस्तहकम होगा और इन शाअल्लाह उम्मत-ए-मुस्लिमा की ताक़त और इज़्ज़त दोबारा बहाल होगी।

वाज़ेह रहे कि यह तकरीब अबूजा में हफ्ता-ए-वहदत, रसूल-ए-गरामी-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि व सल्लम और इमाम जाफ़र सादिक अलैहिस्सलाम की वलादत-ए-बासआदत के मौके पर मुनअकिद हुई।

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